सरपंच हनुमान राम फरड़ौदा
 

पिता के एक फोन ने ऑस्ट्रेलिया में लाखों की कमाई करने वाले हनुमान राम फरड़ौदा की किस्मत बदल दी। आज वो राजस्थान में नागौर जिला के फरड़ोद गांव के सरपंच हैं। वो इससे पहले तक ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में एक रिसोर्ट में नौकरी करते थे। हनुमान ने कहा कि उनके गांव में पंचायत चुनाव होने थे और सरकारी नियम के मुताबिक इस चुनाव में लड़ने वाले उम्मीदवार कम से कम 8वीं पास होना जरूरी था। जबकि उनके गांव के दो तिहाई से ज्यादा लोग इस योग्यता को पूरा नहीं कर रहे थे। यहीं से इनकी लाइफ का टर्निंग प्वाइंट स्टार्ट हुआ। हनुमान ने फोन आने की बात को बताते हुए कहा कि एक रात उनके पिता भूरा राम का फोन आया। पिता ने हनुमान काे बताया कि फरड़ोद गांव के लोग चाहते हैं कि वो इंडिया वापस आकर सरपंच का चुनाव लड़े। ऑस्ट्रेलिया में मोटी कमाई छोड़कर राजस्थान के नागौर जिले के हनुमान राम फरड़ौदा वापस अपने गांव आया लौट आये हैं और इनका मकसद है अपने गांव वालों की सेवा करना। 27 साल के हनुमान राम फरड़ौदा ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में एक रिसोर्ट में नौकरी कर रहे थे । उनके पास गांव से उनके पिता भूरा राम का फोन आया। भूरा राम का कहना था कि गांव के लोग चाहते हैं कि हनुमान वापस आए और पंचायत चुनाव में सरपंच का उम्मीदवार बनें । हाल ही में राजस्थान सरकार के एक कानून के अनुसार सरपंच बनने के लिए 8वीं पास होना और जिला परिषद सदस्य बनने के लिए पास 10वीं पास होने का सर्टिफिकेट होना जरूरी हो गया है। फरड़ोद गांव में ज़्यादातर बूढ़े-बुज़ुर्गों ने सिर्फ पांचवीं तक की पढ़ाई की है, तो उन्होंने सोचा क्यों न किसी युवा को मौक़ा दिया जाए। हनुमान कहते हैं, मेरे पास गांव से फोन आया कि आप चुनाव लड़ने को तैयार हो क्या... मैं शुरू से ही समाज सेवा करना चाहता था। ऑस्ट्रेलिया में खुश था, लेकिन जब गांव वालों ने मौका दिया, तो मैं वापस आ गया। हनुमान ने अपने चुनाव अभियान में सिर्फ विकास की बात की और जातिगत राजनीति पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया। चुनाव में उन्होंने अधिक वोटों से जीत हासिल की। हनुमान ने कहा, मैंने जाति के आधार पर वोट नहीं मांगे, मैंने काम के आधार पर वोट मांगे... हम जात-पात से जब ऊपर उठेंगे, तभी समाज की उन्नति होगी। गांव के बूढ़े-बुजुर्गों का समर्थन तो था ही, साथ ही युवा वर्ग की आशाओं ने भी मेरी जीत में मददगार रही। उनके एक युवा समर्थक ने बताया, अनपढ़ सरपंच को तो जयपुर में कोई दफ्तर या विधानसभा के अंदर घुसने ही नहीं देगा। हनुमान भैया ऑस्ट्रेलिया से पढ़कर आए हैं, तो किसी भी ऑफिस जाने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं आएगी।